कोटदीजी
कोटदीजी में एक आदि हड़प्पा स्तर भी मिला है, इस स्तर के मृदभाण्डों में मोर, मृग, मछली, शल्क तथा जुडी हुई गेंदों की आकृतियों का अपरिष्कृत चित्रण किया गया है। कोटदीजी के विस्तृत स्तर में काँस्य धातु की चपटे फलक वाली कुल्हाड़ी, पत्थर के तीराग्र, छैनी, अंगूठी, इकहरी एवं दोहरी चूड़ियाँ आदि वस्तुएँ भी मिले हैं।
महत्वपूर्ण बिन्दु
- कोटदीजी सिंध प्रान्त के खैरपुर नामक स्थान पर स्थित है।
- इस स्थान की खोज सर्वप्रथम धुर्ये ने 1935 में की थी।
- कोटदीजी की नियमित खुदाई 1953 में फज़ल अहमद खान के द्वारा करायी गयी थी।
- इस बस्ती के चरों ओर पत्थर से बनी दीवार प्राप्त हुई है जो 3000 ई. पू. की प्रतीत होती है।
- पाषाण कालीन सभ्यता का अन्त कोटदीजी में ही माना जाता है।
- कोटदीजी से प्राक्क हड़प्पा सभ्यता तथा हड़प्पा सभ्यता दोनों के अवशेष प्राप्त होते हैं।
- कोटदीजी के विस्तृत स्तर में काँस्य धातु की चपटे फलक वाली कुल्हाड़ी, पत्थर के तीराग्र, छैनी, अंगूठी, इकहरी एवं दोहरी चूड़ियाँ आदि वस्तुएँ भी मिले हैं।
- यहाँ से प्राप्त मृदभाण्डों पर मोर, मृग, मछली, शल्क तथा जुडी हुई गेंदों की आकृतियों का अपरिष्कृत चित्रण किया गया है।


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