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Kuntasi (कुंतासी)

कुंतासी


कुंतासी- गुजरात राज्य के मोरबी जिले के मालिया तालुका में मोरबी से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थल कुंतासी गांव से लगभग 3 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में फुलकी नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है। इस स्थल की खुदाई एम. के. धावलिकर , एम. आर. आर. रावल  तथा वाई. एम. चितलवास द्वारा कराई गयी थी। यहाँ से विकसित तथा उत्तरकालीन हड़प्पा के स्तर प्रकाश में आये हैं।  यहाँ से प्राप्त अवशेषों से ज्ञात होता है कि यहाँ व्यापार केंद्र तथा निगरानी स्तम्भ स्थापित थे। बंदरगाह में खुदाई से प्राप्त अवशेषों में लम्बी सुराहियां, दो हत्थे कटोरे तथा मिट्टी के खिलौने गाडी आदि प्रमुख हैं। एक मकान के कमरे से सेलखड़ी के हज़ारों मनके तथा तांबे की कुछ चूड़ियां एवं दो अंगूठियां मिली हैं। इस स्थल की पहचान एक घाट और एक निर्माण केंद्र के रूप में की गयी है। 

    कुंतासी में 2 दीवार वाला एक शहर और बिना दीवार वाला एक उपनगर था। दीवार के पश्चिमी किनारे पर एक पत्थर का चबूतरा था। ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक सुनियोजित बंदोबस्त था , जिसे उत्पादन, भण्डारण और माल की आवाजाही के लिए स्थापित किया गया था। दीवार वाले शहर के अंदर एक बड़ा औद्योगिक परिसर और कई भण्डारण सुविधाएं थीं। एक निजी रसोई सहित कई कमरों वाला एक केंद्रीय रूप से स्थित एक घर भी मिला है। अन्य घर चारदीवारी के उत्तर और पश्चिम में स्थित हैं, जिनमें अधिकांशतः बड़े आयताकार भवन हैं। कुंतासी में घर हड़प्पा के अनुपात में असामान्य रूप से बड़े थे जो मिट्टी की ईटों की दीवारों के साथ पत्थर की नींव पर बनाये गए थे। यहाँ दक्षिण-पश्चिम कोने में एक बड़ा अलग कमरा भी मिला है, जिसकी पहचान अधिकांश बस्ती की सेवा करने वाली रसोई के रूप में की गयी है। 

    इमारतों को एक बड़े खुले स्थान के चरों ओर व्यवस्थित किया गया था। कुंतासी शहर में गढ़ का आभाव था जो सिन्धु घाटी सभ्यता से सम्बंधित बड़े शहरों जैसे कालीबंगा, धोलावीरा तथा बनावली आदि शहरों में प्रमुख था। खाड़ी के नीचे जाने वाली नावों पर माल लादने तथा उतरने के लिए एक जेट्टी अथवा प्लेटफार्म की पहचान भी की गयी है। 

    कुंतासी की एक दोहरी दीवार थी, जो शिलाखंडों और मिट्टी से बनी थी, जो लगभग 20 मीटर चौड़े मार्ग से अलग हुई थी। शहर के दक्षिण-पश्चिम कोने में एक मीनार थी और पूर्वी हिस्से में एक गेट थे जो गॉर्ड कक्षों से घिरा हुआ था, संभवतः यह कार्य दीवार वाले क्षेत्र में सार्वजनिक पहुँच को नियंत्रित करने के लिए किया गया था। 

    यहाँ से चित्र के साथ मिट्टी के बर्तन पाए गए हैं।  दो बेलनाकार पत्थर के लंगर भी यहाँ से पाए गए हैं, जो समुद्री गतिविधि की ओर संकेत करते हैं। कुंतासी से तांबे के ढेर के साथ छोटा बर्तन तथा कुछ तांबे के चूड़ियाँ भी मिली हैं। अन्य कलाकृतियों में क्यूबिकल चार्ट वजन, हड्डियों से बने उपकरण, टेराकोटा की बनी खिलौना गाड़ियां, अगेट और करेलियन सामान भी कुंतासी से मिले हैं। 


महत्वपूर्ण बिन्दु

  • गुजरात राज्य के मोरबी जिले में मोरबी से 30 किलोमीटर दूर स्थित है।
  • यह स्थल कुंतासी गांव से लगभग 3 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
  • कुंतासी फुलकी नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है।
  • इस स्थल की खुदाई एम. के. धावलिकर , एम. आर. आर. रावल  तथा वाई. एम. चितलवास द्वारा कराई गयी थी।
  • बंदरगाह में खुदाई से प्राप्त अवशेषों में लम्बी सुराहियां, दो हत्थे कटोरे तथा मिट्टी के खिलौने गाडी आदि प्रमुख हैं।
  • कुंतासी में 2 दीवार वाला एक शहर और बिना दीवार वाला एक उपनगर था।
  • यहाँ दक्षिण-पश्चिम कोने में एक बड़ा अलग कमरा भी मिला है, जिसकी पहचान अधिकांश बस्ती की सेवा करने वाली रसोई के रूप में की गयी है।
  • कुंतासी में इमारतों को एक बड़े खुले स्थान के चरों ओर व्यवस्थित किया गया था। 
  • खाड़ी के नीचे जाने वाली नावों पर माल लादने तथा उतरने के लिए एक जेट्टी अथवा प्लेटफार्म की पहचान भी की गयी है।
  • यहाँ से चित्र के साथ मिट्टी के बर्तन पाए गए हैं।
  • दो बेलनाकार पत्थर के लंगर भी यहाँ से पाए गए हैं, जो समुद्री गतिविधि की ओर संकेत करते हैं।
  • शहर के दक्षिण-पश्चिम कोने में एक मीनार थी और पूर्वी हिस्से में एक गेट थे जो गॉर्ड कक्षों से घिरा हुआ था।
  • कुंतासी की एक दोहरी दीवार थी, जो शिलाखंडों और मिट्टी से बनी थी। 

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